
चाहे कोई लड़की हो या महिला, पीसीओडी की समस्या आजकल सब औरतों में काफी आम हो गयी है। और यह एक तेज़ी से फैलने वाली गंभीर समस्या है। इसके कई शरीक संकेत होते है जैसे अचानक वज़न बढ़ना, पीरियड्स मिस होना, या चेहरे पर बालो का या मुंहासो का दिखना।
पर ये कारण किसी और चीज़ के भी हो सकते है। ऐसे निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है की पीसीओडी है या नहीं। इसे पता करने के लिए एक डॉक्टर आपको टेस्ट्स करवाने के लिए कहेगा पर आख़िर पीसीओडी टेस्ट कैसे होता है? क्या ये ब्लड टेस्ट है, अल्ट्रासाउंड है, या दोनों? और क्या घर पर कुछ उपाय से इसे कंट्रोल किया जा सकता है?
इस ब्लॉग में हम आसान भाषा में समझेंगे कि PCOD जांच कैसे होती है, इसके लक्षण और कारण क्या हैं, और साथ ही कुछ असरदार पीसीओडी के घरेलू उपाय भी जानेंगे।
पीसीओडी क्या है?
सबसे पहले समझते हैं कि पीसीओडी होता क्या है।
PCOD यानी Polycystic Ovarian Disease, एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) में छोटे-छोटे सिस्ट (थैली) बनने लगते हैं। ये सिस्ट अंडे को पूरी तरह विकसित नहीं होने देते, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है।
कई बार महिलाएं सोचती हैं कि ये सिर्फ पीरियड्स की दिक्कत है, लेकिन असल में ये शरीर के पूरे हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।
पीसीओडी के लक्षण (PCOD Symptoms)
अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो ये पीसीओडी के संकेत हो सकते हैं:
- पीरियड्स का मिस होना या बहुत देर से आना
- वजन तेजी से बढ़ना, खासकर पेट के आस-पास
- चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल
- चेहरे पर लगातार पिंपल्स या एक्ने
- बालों का झड़ना या पतला होना
- मूड स्विंग्स और थकान
इन लक्षणों को हल्के में न लें, क्योंकि ये हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकते हैं। ऐसे में सबसे ज़रूरी है कि आप जांच करवाएं।
पीसीओडी टेस्ट कैसे होता है? (How is PCOD test done?)
अब आते हैं सबसे अहम सवाल पर, पीसीओडी टेस्ट कैसे होता है?
दरअसल, पीसीओडी को समझने के लिए डॉक्टर कुछ जरूरी जांच करवाते हैं ताकि शरीर के अंदर क्या चल रहा है, ये साफ़ पता चल सके।
यहां जानते हैं एक-एक करके कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं 👇
1. ब्लड टेस्ट (Blood Tests)
ब्लड टेस्ट से शरीर में हार्मोन का स्तर पता लगाया जाता है। इसमें मुख्य रूप से ये जांचें शामिल होती हैं:
- LH और FSH टेस्ट: ये हार्मोन ओव्यूलेशन यानी अंडे के बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
- टेस्टोस्टेरोन टेस्ट: अगर शरीर में पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन ज़्यादा हो जाता है, तो चेहरे पर बाल और मुंहासे बढ़ सकते हैं।
- थायरॉइड टेस्ट (TSH, T3, T4): थायरॉइड असंतुलन भी पीरियड्स पर असर डाल सकता है।
- इंसुलिन और ब्लड शुगर टेस्ट: क्योंकि कई बार पीसीओडी के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस भी जुड़ा होता है।
- AMH टेस्ट (Anti-Müllerian Hormone): इससे अंडाशय में अंडों की मात्रा का पता चलता है।
ये ब्लड टेस्ट सुबह खाली पेट करवाना बेहतर होता है।
2. अल्ट्रासाउंड टेस्ट (Ultrasound Scan)
यह सबसे महत्वपूर्ण जांच होती है।
अल्ट्रासाउंड से डॉक्टर ओवरी की अंदरूनी तस्वीर देखते हैं और पता लगाते हैं कि क्या वहां सिस्ट हैं, उनका साइज और संख्या कितनी है।
- आमतौर पर यह Pelvic Ultrasound या Transvaginal Ultrasound होता है।
- इसमें किसी दर्द की जरूरत नहीं होती, बस कुछ मिनटों की प्रक्रिया होती है।
- इससे साफ पता चल जाता है कि ओवरी नॉर्मल है या पॉलीसिस्टिक पैटर्न में है।
3. शारीरिक जांच (Physical Examination)
डॉक्टर आपके वजन, BMI, और चेहरे/त्वचा पर हो रहे बदलावों को देखकर भी संकेत लेते हैं।
कई बार डॉक्टर पीसीओडी के कारण होने वाले लक्षणों से ही अंदाजा लगा लेते हैं और उसके अनुसार आगे की जांच करवाते हैं।
पीसीओडी के कारण (Causes of PCOD)
अब जानते हैं कि आखिर पीसीओडी होता क्यों है?
इसका कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि कई फैक्टर मिलकर इसे ट्रिगर करते हैं।
मुख्य कारण:
- हार्मोनल असंतुलन (खासकर इंसुलिन और टेस्टोस्टेरोन)
- जंक फूड और प्रोसेस्ड चीज़ों का ज़्यादा सेवन
- स्ट्रेस और नींद की कमी
- एक्सरसाइज की कमी या बहुत ज़्यादा वजन
- परिवार में किसी को पीसीओडी होना (Genetic factor)
अगर आप इन कारणों को समझ लें और थोड़ा-थोड़ा सुधार करें, तो पीसीओडी को काफ़ी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
पीसीओडी के घरेलू उपाय (Home Remedies for PCOD)
टेस्ट करवाना ज़रूरी है, लेकिन रोज़मर्रा की आदतों में सुधार भी उतना ही अहम है।
यहां कुछ आसान पीसीओडी के घरेलू उपाय हैं जो शरीर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं 👇
1. हेल्दी डाइट अपनाएं
- चीनी, तले हुए और पैकेट वाले खाने को कम करें।
- अपनी डाइट में हरी सब्जियां, दालें, फल, और साबुत अनाज शामिल करें।
- दिन में 2-3 बार ग्रीन टी या दालचीनी पानी पीना फायदेमंद रहता है।
2. रोज़ाना योग या एक्सरसाइज करें
- योगासन जैसे भुजंगासन, मंडूकासन, और सूर्य नमस्कार पीसीओडी के लिए बहुत फायदेमंद हैं।
- हर दिन 30 मिनट वॉक या हल्की एक्सरसाइज करने से हार्मोनल बैलेंस बना रहता है।
3. तनाव कम करें
स्ट्रेस हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ सकता है।
- मेडिटेशन, संगीत सुनना, या अपनी पसंद का काम करें।
- अच्छी नींद (7-8 घंटे) लेना ज़रूरी है।
4. हर्बल उपाय आज़माएं
- मेथी दाना पानी और फ्लैक्स सीड्स (अलसी) हार्मोन बैलेंस में मदद करते हैं।
- आंवला जूस शरीर को डिटॉक्स करता है और ओवरी फंक्शन को सपोर्ट करता है।
- दालचीनी ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करती है, जिससे पीसीओडी के लक्षण कम होते हैं।
5. हाइड्रेटेड रहें
दिनभर में 8–10 गिलास पानी पीना बेहद जरूरी है। इससे बॉडी टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और स्किन भी ग्लो करती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर आपके पीरियड्स लगातार मिस हो रहे हैं, वजन तेजी से बढ़ रहा है, या चेहरे पर पिंपल्स और बाल बढ़ रहे हैं — तो देर न करें।
डॉक्टर से जांच करवाएं, क्योंकि पीसीओडी जितनी जल्दी पकड़ी जाए, उसे उतना ही आसानी से संभाला जा सकता है।
निष्कर्ष
पीसीओडी कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक हार्मोनल असंतुलन है।
थोड़ी समझदारी, सही टेस्ट, और जीवनशैली में छोटे बदलाव से आप इसे पूरी तरह कंट्रोल कर सकती हैं।
तो अब जब भी कोई पूछे, “पीसीओडी टेस्ट कैसे होता है?”, तो आप आत्मविश्वास से कह सकती हैं कि इसमें कुछ ब्लड टेस्ट, एक अल्ट्रासाउंड और थोड़ी-सी जागरूकता ही काफी है।
स्वस्थ रहें, खुद से प्यार करें, और अपने शरीर की सुनें।
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